Improved Sugarcane Varieties: किसान भाइयों आप सभी इस बात को अच्छे से जानते है की भारत में गन्ने की फसल को एक नगदी फसल के रूप में माना जाता है और आज के समय में जब भारत सरकार ने पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की अनुमति दे दी है तो इसके बाद से किसानों को इससे और अधिक लाभ मिलने लगा है। देश में चीनी, गुड़, खांड या फिर एथनॉल के बिज़नेस में गन्ने को रीढ़ की हड्डी माना जाता है क्योंकि इसके बिना ये सब नहीं बन सकता।
आज देश के लाखों किसान परिवार गन्ने की खेती कर रहे है और अपनी आजीविका चला रहे है। गन्ने के बेहतर उत्पादन और अधिक मिठास वाला गणना उत्पादन के लिए जरुरी है की किसान गन्ने की एक सही किस्म का चुनाव करे और उसकी खेती करे। कुछ कृषि वैज्ञानिकों का मानना है की अगर हमारे किसान भाई उन्नत किस्म का चुनाव करे और किस्म रोग प्रतिरोधी हो तो गन्ने का उत्पादन 20 से लेकर 40 फीसदी तक आसानी से बढ़ाया जा सकता है।

गन्ने की उन्नत किस्म बहुत जरुरी है – जानिए क्यों
कई किसान भाई सोचते है की गन्ने को मिल में भेजना है तो इसमें किस्म क्या देखनी। लेकिन इस जगह पर किसान गलत होता है क्योंकि उन्नत किस्म का चुनाव गन्ने की गुणवत्ता तो बढाती ही है साथ में किसान की अधिक उत्पादन के जरिये कमाई भी बढाती है। पारम्परिक किस्मों की बजाय उन्नत किस्म अधिक पैदावार देती है, उसमे अधिक शर्करा प्रतिशत होता है, रोगो के प्रति शहनशील होती है जिससे किसान की मेहनत बचती है और हर प्रकार के मौसम के बदलाव को भी सहन कर लेती है। Improved Sugarcane Varieties
इसलिए किसान भाइयों को गन्ने की उन्नत किस्म का चुना करना बहुत ही जरुरी हो जाता है। आइये आज किसान भाइयों को गन्ने की कुछ उन्नत किस्मों की जानकारी हम यहां इस आर्टिकल में दे देते है।
Co 0238 (को-0238) – गन्ने की सबसे डिमांडिंग किस्म
किसान भाइयों पिछले कुछ सालों में गन्ने की Co 0238 (को-0238) किस्म ने पुरे उत्तर भारत में गन्ने की खेती की तस्वीर को पूरी तरह से बदल दिया है। इस किस्म से किसानों को अधिक उत्पादन तो मिलता ही है साथ में इस किस्म को अधिक चीनी रिकवरी के लिए भी जाना जाता है। प्रति हेक्टेयर में किसान भाई इस किस्म से आसानी से 900 से 1200 क्विंटल या फिर इससे भी अधिक पैदावार ली जा सकती है।
चीनी मीलों में इस किस्म को बहुत पसंद किया जाता है क्योंकि इस गन्ने की Co 0238 (को-0238) किस्म में शर्करा की मात्रा बहुत अधिक होती है। इस किस्म का गणना काफी मोटाई वाला होता है और उसमे रस की मात्रा काफी अधिक होती है। अच्छी पेड़ी (रैटून) फसल देने की क्षमता रखने वाली ये किस्म किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है और अगर किसान समय पर सिंचाई का काम और खाद और उर्वरक देते है तो इससे और भी अधिक पैदावार ली जा सकती है।
CoJ 85 (कोजे-85) – अधिक कल्ले वाली गन्ने की किस्म
किसान भाइयो अगर आप अपने खेत में गन्ने की एक ऐसी किस्म को लगाना चाहते है जिसमे अधिक से आधी कल्ले निकले तो इसके लिए आपको CoJ 85 (कोजे-85) किस्म को अपने खेतो में लगाना चाहिए और आपको बता दें की ये किस्म हरियाणा, पंजाब के साथ साथ में पश्चिमी उत्तरप्रदेश के किसान के बीस काफी लोकप्रिय भी है। Improved Sugarcane Varieties
गन्ने की CoJ 85 (कोजे-85) किस्म जल्दी तैयार होने वाली किस्म और और इसमें मिठास के साथ साथ रस की मात्रा काफी अधिक होती है। ये किस्म रोगप्रतिरोधी छमता के साथ आती है और गुड़ बनाने वाली फैक्ट्रियों में इसकी काफी अधिक डिमांड रहती है।
किसान भाइयो ये किस्म कम पानी में भी काफी अच्छी पैदावार देती है और कई अलग अलग प्रकार की मिट्टी में भी इसकी फसल काफी अच्छी पैदावार देने में सक्षम होती है।
CoS 767 – लम्बे लम्बे रस से भरे गन्ने
गन्ने की CoS 767 किस्म के गन्ने बाकि किस्मों की तुलना में काफी अधिक लम्बे होते है जिसमे चलते पैदावार काफी हद तक बढ़ जाती है। उत्तर भारत में गन्ने की CoS 767 किस्म काफी अधिक लोकप्रिय है और इस किस्म में मिठास और रस की मात्रा काफी अधिक होती है जिसके चलते गुड़ इंडस्ट्रीज में इसकी काफी अधिक डिमांड रहती है।
किसान भाइयो गन्ने की इस किस्म में अधिक खाद और उर्वरकों की जरुरत भी नहीं होती है और कई रोगों के प्रति सहनशील तो है ही साथ में अगर इसकी कटाई करने में देरी भी होती है तो भी गन्ने की गुणवत्ता बनी रहती है। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की इस किस्म की बुवाई सबसे अधिक की जाती है।
Co Pant 84211 – चीनी और गुड़ निर्माताओं की पहली पसंद
किसान भाइयों गन्ने की ये किस्म चीनी बनाने वाली मीलों के लिए और गुड़ बनाने वाली मिलो के लिए पहली पसंद मानी जाती है क्योंकि इसमें मिठास के साथ साथ में रस की मात्रा काफी अधिक होती है और कटाई के बाद भी काफी समय तक इसमें रस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में इसको किसान भाई काफी अधिक बुवाई करते है। Improved Sugarcane Varieties
गन्ने की ये किस्म केवल उत्पादन ही नहीं देती बल्कि इसमें मिठास अधिक रहता है और शर्करा की मात्रा भी काफी अधिक रहती है। बाजार में किसानो को इस किस्म से भाव भी बाकि किस्मों की तुलना में अधिक मिलता है जिससे किसानों की आमदनी भी अधिक हो जाती है।
मीठे गन्ने की पहचान क्या होती है?
किसान भाइयों खेत में खड़े गन्ने को देखकर ही पता लगाया जा सकता है की गणना मीठा है की नहीं और इसके लिए आपको ये देखना होता है की गन्ने के तने की मोटाई अधिक हो और वजनी हो। इसके अलावा जब पकने लगता है तो उसकी पत्तियां निचे से सूखती है तो समझो की गणना मीठा है।
अगर गन्ने में गांठों के बीच में उचित दुरी है तो भी ये माना जाता है की गन्ने में मिठास की मात्रा अधिक होगी और उसमे शर्करा भी अधिक मिलेगी। किसान भाइयों को अपने खेतों के लिए गन्ने की उचित किस्म का ही चुनाव नहीं करना होता बल्कि बेहतर उत्पादन को लेने के लिए आज के समय में वैज्ञानिक खेती भी बहुत जरुरी हो चुकी है।
प्रमाणित बीजों का उपयोग करके और बीजों का उपचार करके बुवाई करने से तथा इसके साथ ही खेत में जल निकासी का अच्छे से प्रबंध करके आप आसानी से अच्छी पैदावार ले सकते है। इसके अलावा खेत में संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का प्रयोग आपको करना है और सिंचाई भी समय पर करनी है। इसके अलावा किसान भाइयों बुवाई के समय में गन्ने की एक कतार से दूसरी कतार की दुरी भी काफी मायने रखती है इसलिए इस पर भी आपको ध्यान देना होता है। Improved Sugarcane Varieties
किसान भाइयों आपको बता दें की आज भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित नई तकनीकों और उन्नत किस्मों की मदद से गन्ना उत्पादन में लगातार सुधार हो रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार अगर किसान सही किस्म, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और समय पर सिंचाई की और ध्यान देता है और इससे किसान प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल कर सकते हैं।